Vedanta Chairman Son Death: अनिल अग्रवाल भारतीय कॉर्पोरेट जगत के उन चुनिंदा नामों में से हैं, जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। हाल ही में उनके द्वारा अपनी 75% संपत्ति दान करने का निर्णय न केवल उनकी उदारता को दर्शाता है, बल्कि समाज के प्रति उनकी गहरी संवेदनाओं को भी उजागर करता है।
दान और सादगी, अनिल अग्रवाल का मानवता के प्रति संकल्प
वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। अपने बेटे के निधन के बाद उपजे वैराग्य और जीवन की नश्वरता को समझते हुए, उन्होंने अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा चैरिटी में देने की घोषणा की है।
Vedanta Chairman Son Death News
- बेटे की याद में संकल्प: अग्रवाल ने साझा किया कि इस व्यक्तिगत क्षति ने उनके जीवन के प्रति नजरिए को बदल दिया है।
- सादगी भरा जीवन: उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अब अपनी शेष जिंदगी सादगी के साथ बिताएंगे। उनका मानना है कि धन केवल समाज की भलाई का एक माध्यम है।
- परोपकारी लक्ष्य: यह दान स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के पोषण (विशेषकर ‘नंद घर’ पहल के माध्यम से) के क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा।
- 1986: उन्होंने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना की।
- निजीकरण का लाभ: 2000 के दशक की शुरुआत में, उन्होंने बालको (BALCO) और हिंदुस्तान जिंक जैसी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी। इन कंपनियों को उन्होंने अपनी कार्यक्षमता से घाटे से उबारकर मुनाफे में ला खड़ा किया।
- ग्लोबल पहचान: 2003 में, वेदांता रिसोर्सेज लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी।
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पुत्र के निधन के बाद बदला जीवन का नजरिया: अनिल अग्रवाल दान करेंगे 75% संपत्ति, अब सादगी से जिएंगे जिंदगी
अनिल अग्रवाल के 49 वर्षीय बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक स्कीइंग दुर्घटना के बाद दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। इस दुखद घड़ी में अनिल अग्रवाल ने उस वादे को फिर से दोहराया है जो उन्होंने अपने बेटे से किया था—कि वे अपनी कमाई का 75% से अधिक हिस्सा समाज को लौटा देंगे।
भावी योजना: ‘नंद घर’ और सादा जीवन
अग्रवाल का मुख्य ध्यान अब ‘नंद घर’ परियोजना पर है, जिसका लक्ष्य भारत के लाखों आंगनबाड़ियों का कायाकल्प करना है। उनका मानना है कि यदि बच्चों को सही पोषण और शिक्षा मिले, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।
खुद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे अब एक साधारण जीवन जीना चाहते हैं। वे लग्जरी और तड़क-भड़क से दूर रहकर अपना समय अपनी जड़ों और समाज की सेवा में समर्पित करेंगे।
”दौलत केवल एक जिम्मेदारी है। मेरे बेटे की याद में, मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि मेरी कमाई का अधिकांश हिस्सा देश के बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के काम आए।” — अनिल अग्रवाल
निष्कर्ष
अनिल अग्रवाल की यह पहल केवल धन का दान नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए एक संदेश है कि सफलता का असली पैमाना आपके बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि आपके द्वारा समाज में लाए गए बदलाव में है।