डॉक्टरी नहीं, इबादत: मिलिए पूर्णिया के उस ‘मसीहा’ से जो मात्र ₹100 में बाँट रहे हैं नई जिंदगी Dr Tarkeshwar Kumar Story in Hindi

Dr Tarkeshwar Kumar Story in Hindi : आज के दौर में जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ लगातार महंगी होती जा रही हैं और बड़े अस्पतालों की फीस आम आदमी की पहुँच से बाहर होती जा रही है, वहीं बिहार के पूर्णिया जिले के एक डॉक्टर मानवता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। डॉ. तारकेश्वर कुमार, जिन्हें लोग प्यार से ‘100 रुपये वाला डॉक्टर’ कहते हैं, पिछले कई वर्षों से समाज के पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक वरदान साबित हो रहे हैं।

​संघर्षों से भरा रहा शुरुआती सफर

​डॉ. तारकेश्वर की यह यात्रा इतनी आसान नहीं थी। उनका जन्म एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक किसान थे और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि डॉक्टरी की महंगी पढ़ाई का खर्च उठा सके। डॉ. तारकेश्वर बताते हैं कि उन्होंने अपने छात्र जीवन में बेहद अभाव देखे हैं। कई बार उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कड़ी मेहनत और संघर्ष करना पड़ा।

Dr Tarkeshwar Kumar Story in Hindi

डॉक्टरी नहीं, इबादत: मिलिए पूर्णिया के उस ‘मसीहा’ से जो मात्र ₹100 में बाँट रहे हैं नई जिंदगी

​यही वह संघर्ष था जिसने उनके मन में सेवा का बीज बोया। उन्होंने तभी तय कर लिया था कि यदि वे डॉक्टर बने, तो अपना जीवन उन लोगों के लिए समर्पित करेंगे जो पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पाते।

​मात्र 100 रुपये फीस और मुफ्त परामर्श

​पूर्णिया के लाइन बाजार क्षेत्र में अपनी क्लिनिक चलाने वाले डॉ. तारकेश्वर कुमार की सबसे खास बात उनकी 100 रुपये की मामूली फीस है। जहाँ शहर के अन्य क्लीनिकों में परामर्श शुल्क 500 से 1000 रुपये तक होता है, वहीं डॉ. कुमार का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि लोगों की सेवा करना है।

  • गरीबों के लिए द्वार: उनके पास आने वाले कई मरीज ऐसे होते हैं जो 100 रुपये देने में भी सक्षम नहीं होते। ऐसे मरीजों का वे न केवल मुफ्त इलाज करते हैं, बल्कि अपनी जेब से दवाइयों का खर्च भी उठाते हैं।
  • दिन-रात सेवा: वे केवल एक डॉक्टर के रूप में नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में मरीजों से मिलते हैं, जिससे मरीज मानसिक रूप से भी स्वस्थ महसूस करता है।

​समाज के लिए एक प्रेरणा

​डॉ. तारकेश्वर का मानना है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा है। उनके इस निस्वार्थ कार्य की चर्चा अब पूरे बिहार में हो रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचारों के माध्यम से उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है जो चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।

​”डॉक्टरी पेशा ईश्वर की सेवा के समान है। यदि मेरे थोड़े से प्रयास से किसी गरीब के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है और उसकी जान बच सकती है, तो यही मेरी असली कमाई है।” — डॉ. तारकेश्वर कुमार

​निष्कर्ष

​डॉ. तारकेश्वर कुमार जैसे लोग यह साबित करते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है। जहाँ चिकित्सा क्षेत्र एक बिजनेस बनता जा रहा है, वहाँ उनकी प्रतिबद्धता और सेवा भाव हम सभी के लिए एक सीख है। वे न केवल बीमारियों का इलाज कर रहे हैं, बल्कि समाज में उम्मीद की एक नई किरण जगा रहे हैं।

राजा शेखर की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है

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