Rathor News: Raj Shekhar Success Story in Hindi ₹100 दिहाड़ी से ₹5 करोड़ का सफर: राजा शेखर की प्रेरक कहानी, सफलता की कहानियाँ अक्सर अभावों की कोख से जन्म लेती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हैदराबाद के एम. राजा शेखर की। कभी जिनके पिता दिन के मात्र 100 रुपये कमाकर घर चलाते थे, आज उसी बेटे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया है, जिसका सालाना रेवेन्यू 5 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
अभावों में बीता बचपन और क्रिकेट का सपना
राजा शेखर का शुरुआती जीवन काफी कठिन था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपने पसंदीदा खेल क्रिकेट को छोड़ना पड़ा और शिक्षा की ओर रुख करना पड़ा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि भारत में 90% छात्र सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण गलत करियर चुन लेते हैं। उन्होंने देखा कि बाजार में मौजूद ज्यादातर एजुकेशन पोर्टल केवल ‘येलो पेजेस’ की तरह जानकारी देते हैं, लेकिन छात्रों को यह नहीं बताते कि उनके लिए क्या सही है।
’कॉलेज मेंटर’ (College Mentor) की शुरुआत
इसी कमी को दूर करने के लिए राजा शेखर ने अपने दोस्त के. वमसी प्रसाद (जो पहले गूगल में कार्यरत थे) के साथ मिलकर अक्टूबर 2024 में ‘College Mentor’ नाम का स्टार्टअप लॉन्च किया। यह सिर्फ एक सूचना पोर्टल नहीं है, बल्कि छात्रों के लिए एक संपूर्ण ‘मेंटरशिप इकोसिस्टम’ है।
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क्या है स्टार्टअप का यूनिक मॉडल? Raj Shekhar Success Story in Hindi
इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘360-डिग्री पर्सनलाइज्ड मेंटरशिप’ मॉडल है। इसके तहत हर छात्र को छह अलग-अलग प्रकार के मेंटर मिलते हैं:
- स्टूडेंट मेंटर: सीनियर की तरह गाइड करने के लिए।
- करियर मेंटर: इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स।
- हेल्थ मेंटर: मानसिक तनाव और स्वास्थ्य के लिए।
- एडमिशन मेंटर: सही कॉलेज और फॉर्म भरने की प्रक्रिया के लिए।
- स्कॉलरशिप मेंटर: आर्थिक मदद की जानकारी के लिए।
- लोन मेंटर: वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए।
पहले ही साल में कमाया 5 करोड़ का रेवेन्यू
महज एक साल के भीतर इस स्टार्टअप ने वित्त वर्ष 2024-25 में 5 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल कर लिया है। कंपनी ने अपनी साख बनाने के लिए ‘कॉलेज मेंटर स्कॉलरशिप टेस्ट’ का भी आयोजन किया, जिसमें 53,000 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। कंपनी अब तक 1 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप बाँट चुकी है और अगले साल इसे बढ़ाकर 5 करोड़ करने का लक्ष्य है।
भविष्य की योजना: AI और 25 करोड़ का लक्ष्य
वर्तमान में हैदराबाद, चेन्नई और तिरुपति जैसे शहरों में सक्रिय यह स्टार्टअप अब एआई (AI) आधारित मेंटरशिप टूल विकसित कर रहा है। राजा शेखर और उनकी टीम का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक 25 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है। आज यह स्टार्टअप 250 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहा है।
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राजा शेखर की यह कहानी साबित करती है कि यदि इरादे नेक हों और विजन साफ हो, तो गरीबी कभी भी कामयाबी के रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती।
पिता कमाते थे ₹100 रोज, बेटे ने खड़ी कर दी करोड़ों की कंपनी
1. अभावों में बीता बचपन
राजा शेखर का बचपन आर्थिक तंगी के बीच बीता। उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे और उनकी दैनिक आय महज ₹100 थी। इतने कम पैसों में परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल था, लेकिन राजा शेखर की आंखों में कुछ बड़ा करने का सपना था।
2. शिक्षा और करियर की शुरुआत
तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरुआत में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन वह हमेशा से जानते थे कि नौकरी से ज्यादा वह दूसरों की मदद करने वाले किसी बिजनेस में रुचि रखते हैं।
3. मेंटरशिप स्टार्टअप की शुरुआत
राजा शेखर ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर एक मेंटरशिप स्टार्टअप (Mentorship Startup) की नींव रखी। इस स्टार्टअप का मुख्य उद्देश्य छात्रों और युवाओं को सही करियर मार्गदर्शन देना और उनके कौशल को निखारना था।
4. FY25 में ₹5 करोड़ का टर्नओवर
शुरुआत में जिस कंपनी के पास संसाधन सीमित थे, उसने अपनी मेहनत और सही विजन के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की। वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में राजा शेखर की इस कंपनी ने ₹5 करोड़ का बिजनेस (Revenue) किया। यह आंकड़ा उस लड़के के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है जिसके परिवार की मासिक आय कभी कुछ हजार रुपये भी नहीं थी।
सफलता के मुख्य सूत्र
- दोस्ती की ताकत: राजा शेखर और उनके मित्र ने मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जहाँ लोग एक-दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
- सही दिशा (Mentorship): उन्होंने बाजार में उस खाली जगह को पहचाना जहाँ युवाओं के पास डिग्री तो थी, लेकिन सही मार्गदर्शन की कमी थी।
- दृढ़ संकल्प: पिता की कम आय को उन्होंने कमजोरी बनाने के बजाय अपनी ताकत बनाया।